Thursday, 27 August 2020

मोदी राज में 91 फीसदी की ऐतिहासिक ऊंचाई पर सरकारी कर्ज, टु’टा 40 साल का रिकॉर्ड : रिपोर्ट

 सरकारों का आ’र्थिक संक’ट किस कदर बढ़ गया है, इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि आने वाले दिनों में सामान्य सरकारी क’र्ज जीडीपी के 91 फीसदी के बराबर हो सकती है। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल गवर्नमेंट का कर्ज़ जो केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त देनदारियों का हिस्सा है .

वह इस फाइनेंशियल ईयर में में जीडीपी के मुकाबले 91% हो जाएगा। 1980 के बाद से जीडीपी के मुकाबले क’र्ज का यह सबसे ऊंचा स्तर होगा, जब से डाटा मेंटेन किया जा रहा है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस के अर्थशास्त्रियों की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 में जीडीपी के मुकाबले जनरल गवर्नमेंट का


कर्ज 75% था।

वित्त वर्ष 2030 तक जीडीपी के मुकाबले कर्ज का अनुपात 80% तक हो जाएगा। विकास में अवरोध पहुंचाए बिना जीडीपी के मुकाबले कर्ज को 60% तक ले जाने का सरकार का टारगेट वित्त वर्ष 2040 तक पूरा होना भी मुश्किल लग रहा है। पिछले कुछ सालों में पूर्ण आर्थिक विकास में सरकारों के कैपिटल आउटले ने एक बड़ी भूमिका निभाई है।


वित्त वर्ष 2016 से सरकार का क’र्ज़ लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2000 में जीडीपी के मुकाबले सरकार का कर्ज़ 66.4% था और जबकि 2015 में यह 66.6% था। 2015 के बाद यह लगातार ते’जी से बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2020 में जीडीपी के मुकाबले कर्ज 75% पर पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है वास्तविक जीडीपी ग्रोथ अगले दशक में भी धीमी रहेगी, जब तक प्राइवेट खर्च तेजी से नहीं बढ़ेगा।

इसकी बहुत संभावना है कि वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी के मुकाबले कर्ज बढ़कर 91% हो जाएगा, जो 1980 जबसे डाटा उपलब्ध हो रहा है, तबसे सबसे अधिक होगा।

पंजाब के मुस्लिमों की बड़ी पहल – बंटवारे के बाद वीरान हुई मस्जिदों कर रहे आबाद

 बंटवारे के बाद वीरान हुई मस्जिदों कर रहे आबाद

देश की आजादी के साथ बंटवारे के रूप में एक बड़ी विपदा भी साथ आई थी। जिसने देश के मुसलमानो पर बड़ा कहर ढहाया था। लाखों-करोड़ों की संख्या में सीमा क्षेत्रों के करीब रहने वाले मुसलमानों को अपना मुल्क छोड़ पाकिस्तान जाकर बसना पड़ा था। जिसके बाद इन इलाकों की मस्जिद, दरगाह और ख़ानक़ाह वीरान हो गई। बँटवारे के 70 साल बाद आज भी ये वीरान है।

हालांकि अब पंजाब के मुसलमानों ने इन मस्जिदों को आबाद करने की पहल  शुरू कर दी है। रोपड़ के एक गांव में जर्जर पड़ी मस्जिद को दोबारा ज़िंदा कर इस पहल को शुरू किया गया है। पंजाब के तमाम गांवों में उन मस्जिदों को रिनोवेट किया जा रहा है, जिसे बंटवारे के वक़्त मुसलमान छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे।


अब इन मस्जिदों का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश और बिहार के मज़दूर कर रहे हैं, जो रोज़ी रोज़गार के लिए पंजाब जाते हैं। इन मस्जिदों में फिर से पंचवक्ता अज़ानों की आवाज न केवल गूंज रही है। बल्कि नमाज़े भी अदा की जा रही है। हालांकि हरियाणा, राजस्थान, गुजरात आदि में ऐसी सैकड़ों मस्जिद अब भी वीरान है। जिनमे ज़्यादातर पुरातत्व विभाग के कब्जे में है।